एकहरी प्रविस्ति प्रणाली
(Single entry System)
लेखांकन के लिए एकहरी प्रविस्ति सबसे प्राचीन प्रणाली है । 1494 ईश्वी से पहले जबकि दोहरा लेखा प्रणाली का आविष्कार भी नहीं हुआ था वैसे समय में किसी भी व्यबसायिक संस्था में लेखांकन के लिए एकहरी प्रविस्ति प्रणाली का ही प्रयोग किया जाता था। वर्तमान समय में भी छोटे -छोटे व्यापारियों द्वारा लेखांकन के लिए एकहरी प्रविस्ति प्रणाली का प्रयोग किया जाता है । एकहरी प्रविस्ति प्रणाली के अंतर्गत न तो किसी व्यबसायिक लेन-देन के लिए जर्नल बनाया जाता है और न ही खाते तैयार किये जाते हैं और न ही परीक्षा सूची तैयार किया जाता है। इसलिए एकहरी प्रविस्ति प्रणाली के अंतर्गत जो लाभ ज्ञात होते हैं वे साधारणतया अनुमानित ही होते हैं । अतः हम कह सकते हैं कि एकहरी लेखा प्रणाली अपूर्ण लेखा प्रणाली है।
जबकि दोहरा लेखा प्रणाली के अंतर्गत जो भी लाभ हानि ज्ञात किया जाता है वह संस्था का वास्तविक लाभ या हानि होता है क्योंकि इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यबसायिक लेन-देन के लिए जर्नल तैयार किया जाता है । जर्नल के आधार पर लेजर तैयार किया जाता है तथा लेजर के आधार पर परीक्षा सूची तैयार किये जाते हैं तथा परीक्षा सूची के आधार पर अंतिम लेखा तैयार किया जाता है ।
एकहरी प्रविस्ति प्रणाली के अंतर्गत लाभ निम्नलिखित सूत्र से निकाला जाता है :-
Statement of P/L Account
(For the year ending ........)
Closing capital (व्यापार का अंतिम पूँजी )
Add:Cash withdraw during the year (व्यापारी द्वारा नीजि काम के लिए निकाला गया रकम)
Less:Opening capital (प्रारंभिक पूँजी )
Less:Additional capital (अतिरिक्त पूँजी )
Add:Additional capital for the year (व्यापारी द्वारा दिया गया अंतिम पूँजी )
Less:Additional Loan
यदि प्रश्न में opening capital या closing capital नहीं दिया हुआ है तो पूँजी निम्नलिखित सूत्र से निकाला जाता है इसके लिए Statement of affair तैयार किया जाता है ।यह वैसे ही तैयार किया जाता है जैसे व्यापारी अपना आर्थिक चिठ्ठा (Balance Sheet ) तैयार करता है अर्थात व्यापारी अपने सम्पत्तियों को दाये भाग में तथा दायित्व को बाये भाग में दिखलाता है तथा दोनों का जो अंतर होता है उसे हम पूँजी कहते हैं ।
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