Process or steps involved in journalising
(1)प्रभावित होने वाले खातों की पहचान करना (To identify the accounts to be affected )
:-प्रत्येक व्यबहार का प्रभाव दो या अधिक खातों पर पड़ता है अतः पुस्तकों में लेखा करने के पूर्व उन दो खातों का पहचान करना आवश्यक है जो लेन - देनों से प्रभावित हो रहे हैं ।
(2)खातों की प्रकृति का निर्धारण करना (To determine the nature of affects )
:-दो या अधिक खातों की पहचान के पश्चात हमें खातो की प्रकृति ज्ञात करनी चाहिए अर्थात क्या ये खाते व्यक्तिगत खाते हैं या वास्तविक खाते हैं या नाममात्र खाते हैं ।
(3)जर्नल के नियम लागू करना (To apply the rule of Journal )
:-खातों की प्रकृति के आधार पर व्यबहारो(लेन-दानो) डेबिट क्रेडिट करने के लिए निर्धारित नियमों को लागू करके जर्नल मे लेखा किया जाता है। अतः सम्बंधित खातो मे से नाम और किसे जमा किया जाना है इसक निश्चित किया जाना है।अतः रोजनमचा मे लेखा करने के लिए जर्नलाइजिंग के नियमों को याद रखना चाहिए ।
(4)जर्नल मे लेखे करना (Passing of entry in the journal)
:-जर्नल के नियमों को लागू करके जर्नल मे लेखा किया जाना चाहिए ।अर्थात डेबिट किया जाने वाले खातों को डेबिट तथा क्रेडिट किया जाने वाले खातों को क्रेडिट किया जाना चाहिए और प्रविस्ति के बाद संक्षेप मे नैरेशन लिखना चाहिए
(5)जोड़ लगाना और आगे ले जाना (Casting and carry forward ) :
अंत में जर्नल के प्रत्येक पृष्ठ में दोनों खानो की राशियो का अलग अलग जोड़ लगाया जाता है क्योंकि जर्नल मे प्रविस्तियाँ कई पृष्ठों तक जारी रह सकती है । डेबिट तथा क्रेडिट दोनों खानो के योग समान होते हैं। यदि जर्नल मे लेखे एक पृष्ठ पर समाप्त नही होती है तो ऐसी स्थिति मे जोड़ वाली राशियो के सामने बायीं ओर विवरण वाले खाने मे आगे ले जाया गया (Carry forward या c/f) अथवा c/d शब्द लिख दिया जाता है और दूसरे पृष्ठ के ऊपर और जर्नल मे लेखे करने के पूर्व उन्हीं राशियो को डेबिट व क्रेडिट खानो मे आगे लाया गया (Brought forward या b/ f या b/d)लिख दिया जाता है।
IMPORTANT WORDS
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